रक्सा–कोलमी के किसानों का स्पष्ट संदेश जहाँ निजी स्वार्थ होता है, वहीं अचानक विरोध जन्म लेता है—हम विकास के साथ
अनूपपुर ।
रक्सा–कोलमी न्यू जोन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की प्रस्तावित परियोजना को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच रक्सा–कोलमी के प्रभावित किसानों और ग्रामीणों ने एक बार फिर दो टूक शब्दों में अपनी बात रखी है। ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना से जुड़े वास्तविक प्रभावित परिवारों को कोई मौलिक आपत्ति नहीं है, लेकिन हर बार की तरह इस बार भी कुछ लोग ऐसे सक्रिय हो गए हैं, जिनका विरोध सिर्फ वहीं दिखाई देता है जहाँ निजी स्वार्थ साधने की संभावना होती है।
ग्रामीणों के अनुसार, यह कोई नई बात नहीं है। जिले में जब-जब कोई बड़ी औद्योगिक, सड़क, बिजली या खनन परियोजना आती है, तब-तब वही चेहरे सामने आते हैं, जो पहले विरोध का माहौल बनाते हैं और बाद में अपने निजी हित पूरे होते ही चुप हो जाते हैं। किसानों का कहना है कि यह विरोध सिद्धांत का नहीं, सौदेबाजी का होता है, जिसे स्थानीय जनता भली-भांति पहचानती है।
प्रभावित किसानों ने स्पष्ट किया कि जिन परिवारों की जमीन, आजीविका या पर्यावरण सीधे तौर पर परियोजना से जुड़ा मुद्दा है, उनसे कंपनी और प्रशासन ने सीधे संवाद किया है। मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार को लेकर जो प्रक्रियाएँ अपनाई गई हैं, वे कानून और नियमों के दायरे में हैं। इसलिए वास्तविक किसानों के बीच असंतोष नहीं, बल्कि स्पष्टता और संवाद है।
ग्रामीणों ने यह भी कहा कि जो लोग आज “जनहित” की आड़ में विरोध कर रहे हैं, वे न तो परियोजना क्षेत्र के स्थायी निवासी हैं और न ही उनका नाम प्रभावितों की आधिकारिक सूची में है। ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक है कि विरोध की असली वजह जनहित है या निजी लाभ की राजनीति।
अंत में रक्सा–कोलमी के किसानों ने जिला प्रशासन और आम जनता से अपील की है कि जहाँ वास्तविक आपत्ति है और जहाँ निजी स्वार्थ से उपजा शोर है, उसके बीच स्पष्ट अंतर किया जाए। ग्रामीणों का मानना है कि विकास, रोजगार और क्षेत्रीय प्रगति को बार-बार निजी एजेंडों की भेंट चढ़ाना अब स्वीकार्य नहीं है।


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