शहडोल।
रामपुर बटुरा कोयला खदान को इस वर्ष कोयला ई-ऑक्शन का ऑफर न दिया जाना कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। जानकारों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो जनवरी माह से खदान के चक्के पूरी तरह थम जाएंगे और कोयला उत्पादन शून्य पर पहुंच जाएगा। सवाल यह है कि क्या यह सब किसी सुनियोजित योजना का हिस्सा है?
ई-ऑक्शन के अभाव में कोयला परिवहन बंद होने की कगार पर है, जबकि इस खदान से जुड़ा पूरा तंत्र रेक के माध्यम से होने वाले कोयला परिवहन पर निर्भर है। ट्रांसपोर्टर, वाहन चालक, लोडिंग-अनलोडिंग श्रमिक और सहायक कर्मचारी—सभी आज गहरी अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं। सैकड़ों परिवारों की आजीविका पर सीधा संकट मंडराने लगा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब देश में कोयले की मांग लगातार बनी हुई है, तब एक चालू खदान को ई-ऑक्शन से बाहर रखने का फैसला किसके हित में लिया गया?
क्या स्थानीय स्तर पर रोजगार खत्म होने की चिंता किसी को नहीं है?
स्थानीय लोगों और श्रमिक संगठनों का आरोप है कि यदि समय रहते ई-ऑक्शन की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई, तो यह सिर्फ एक खदान का बंद होना नहीं होगा, बल्कि क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर सीधा हमला साबित होगा। प्रशासन और प्रबंधन की चुप्पी भी संदेह को और गहरा कर रही है।
अब देखना यह है कि संबंधित विभाग इस गंभीर स्थिति पर संज्ञान लेता है या फिर रामपुर बटुरा कोयला खदान को धीरे-धीरे ठप कर देने की इस प्रक्रिया को मौन स्वीकृति दे दी जाएगी।


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