भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी ग्राम पंचायत गोहन्ड्रा: सरपंच और सचिव पर फर्जी भुगतान का आरोप
अनूपपुर
कोतमा/गोहन्ड्रा: जिले की ग्राम पंचायत गोहन्ड्रा एक बार फिर सरपंच सूरज अगरिया और सचिव चिंतामणि केवट की कार्यप्रणाली के कारण विवादों में है। ताजा मामला स्टॉपडेम (चेक डैम) बंधान कार्य में हुए वित्तीय भ्रष्टाचार से जुड़ा है, जहाँ बिना कार्य कराए ही सरकारी खजाने से हजारों रुपये की राशि आहरित करने का आरोप लगा है।
किसानों ने किया श्रमदान, पंचायत ने डकारे पैसे
स्थानीय ग्रामीणों और प्रभावित किसानों का आरोप है कि साल 2025 में ग्राम पंचायत द्वारा एक भी स्टॉपडेम बंधान का कार्य नहीं कराया गया है। पिछले वर्ष (2024) ईंट, रेत और सीमेंट से बनाए गए चेक डैम से जल निकासी के लिए किसानों ने बरसात के समय उसे नीचे से एक-एक फीट तोड़ दिया था। इस वर्ष उस टूटे हुए हिस्से की मरम्मत और बंधान का कार्य स्वयं स्थानीय किसानों और ईंट बनाने वाले मजदूरों ने मिलकर किया है। इसमें पंचायत का कोई योगदान नहीं रहा।
फर्जी भुगतान का सनसनीखेज खुलासा
भ्रष्टाचार का मुख्य पहलू यह है कि पंचायत ने इस साल 2025 में किसी भी मजदूर से कार्य नहीं कराया, फिर भी वेंडर के माध्यम से 30,680 रुपये का भुगतान कर दिया गया। आरोप है कि सरपंच और सचिव ने अपने व्यक्तिगत आर्थिक लाभ के लिए कागजों पर कार्य दिखाकर यह राशि निकाली है। इतना ही नहीं, स्टॉपडेम का बंधान केवल तीन स्थानों पर हुआ है, जबकि भुगतान चार जगहों का दिखाया गया है, जो सीधे तौर पर गबन की श्रेणी में आता है।
पारदर्शिता की मांग: कहाँ हैं मजदूर और मस्टर रोल?
१. ग्रामीणों ने प्रशासन से तीखे सवाल पूछे हैं। यदि पंचायत ने कार्य कराया है, तो:
२ . उन मिस्त्री और मजदूरों के नाम सार्वजनिक किए जाएं जिन्होंने कार्य किया।
३. ऑनलाइन भुगतान पत्रक (Muster Roll) और मजदूरों की सूची उपलब्ध कराई जाए।
वेंडर को किस आधार पर ₹30,680 का भुगतान किया गया, इसकी जांच हो।
जांच के घेरे में जिम्मेदार
ग्राम पंचायत में हुए इस कथित "भ्रष्टाचार के नए अध्याय" ने शासन की मंशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों का कहना है कि उनकी मेहनत का श्रेय और सरकारी पैसा, दोनों ही भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहे हैं। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस मामले में दोषी सरपंच और सचिव पर क्या कार्रवाई करता है।







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