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आपातकाल के 50 साल पूरे होने पर जनजातीय विश्वविद्यालय ने संविधान हत्या दिवस मनाया

अनूपपुर। आपातकाल लगाने के 50 साल पूरे होने पर जनजातीय विश्वविद्यालय ने संविधान हत्या दिवस मनाया। इस मौके पर इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय में आयोजित जनजागरण कार्यक्रम में डीन प्रो विकास सिंह ने आज पीएम श्री नरेन्द्र मोदी की किताब 'द इमरजेंसी डायरीज: ईयर दैट फोर्ज्ड आवर लीडर्स' को संदर्भित करते हुए कहा की यह किताब पीएम मोदी की युवावस्था से जुड़ी घटनाओं के बारे में है। आपातकाल लागू किए जाने के समय वे एक युवा कार्यकर्ता थे, जिन्होंने 19 महीने तक आंदोलन में भाग लिया तथा पीएम मोदी ने मीसा बंदियों के घर जाकर उनके इलाज की व्यवस्था की। उस समय बहुत सारे गुप्त समाचार पत्र प्रकाशित होते थे। पीएम मोदी ने उन समाचार पत्रों को बाजारों, छात्रों और महिलाओं के बीच वितरित किया और 24-25 साल की उम्र में गुजरात में संघर्ष का नेतृत्व किया. इस किताब में पीएम नरेंद्र मोदी की संघर्षों की पूरी कहानी है। प्रधानमंत्री मोदी ने साधु, सरदारजी, हिप्पी, अगरबत्ती या अखबार विक्रेता के रूप में जमीन पर काम किया। दिन भर चले इस कार्यक्रम में सैकड़ों छात्रों ने आपातकाल के नेतृत्व वाली सरकार की तानाशाही प्रवृत्ति का प्रतीक बताया और इसे इतिहास का काला दिन कहा है। *देश भर के सभी मीसा बंदियों तथा उनके परिवारों का होगा सम्मान* प्रो विकास ने आगे कहा की आपातकाल के दौरान मीसा के तहत जेल गए स्वतंत्रता सेनानियों और उनके परिवारजनों जो लोकतंत्र रक्षकों को सम्मानित तथा उनके पीड़ा को डॉक्यूमेंट करने का कार्य जनजातीय विवि में वर्षभर चलेगा। मीसा बंदियों ने आपातकाल के कठिन समय में लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए जो संघर्ष किया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है। मीसा बंदियों से आपातकाल के दौरान घटी घटनाओं के विषय पर शोर्ट फिल्म बनाये जायेंगे। कार्यक्रम युवाओं को संविधान हत्या दिवस के बारे में बताने और जागरूक करने के लिए आयोजित किया गया है। देश की जनता एवं युवा जनजागरण करना है की लोकतंत्र और संविधान हत्या की हत्या कैसे की गई थी। देश का 140 करोड़ परिवार समझ रहा है कि लोकतंत्र को नष्ट करने के लिए सत्ता का दुरुपयोग कैसे किया गया था। आपातकाल में पीड़ित लोगों की सच जुबानी, वंशवाद की राजनीति का कुचक्र, तानाशाही के खिलाफ संघर्ष करने वाला लोकतांत्रिक मूल्यों पर एक अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का भी आयोजन किया जायेगा। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से महाकोशल प्रांत युवा आयाम प्रमुख डॉ विनोद वर्मा, डिंडौरी जिला संयोजक हरिश्चंद्र विश्वकर्मा, डॉ दिनेश परस्ते, डॉ दीपक त्रिपाठी, डॉ कमलेश पांडे, अनुराग सिंह, डॉ पंकज प्यासी, डॉ आशीष गुप्ता, शोध विद्वान चिन्मय पांडे, ऋतुराज सौंधिया, मध्य प्रदेश जनजातीय युवा कल्याण प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष खेलन सिंह ओरके, महासचिव हीरा उद्दे, सिंगरौली जिला संयोजक ओम प्रकाश पाठक, आचार्य तुलसी दास, महाकोशल प्रांत पूर्णकालिक मनोहर पेथ्रोल, आस्था भटनागर, प्रियांशु तिवारी, जूही मिश्रा, प्राची विश्वकर्मा, अंशिका सोनी, प्रिया मिश्रा, वाणी मंगलानी, समृद्धि जैन, श्रद्धा विश्वकर्मा, जाहन्वी, ईशा पटैरिया, रुचि विश्वकर्मा, भूमि सिंह, न्याशा पांडे, अंकिता मिश्रा, आयुष मिश्रा, सुमित तिवारी, अभिषेक सिंह बघेल, सिंटू कुमार, अमरनाथ कुमार, अमित चौहान, नागेंद्र सिंह, वैभव मिश्रा, शशांक तिवारी, ऋषिकेश तिवारी, नैमिष चौधरी, स्वप्निल बरदिया, अक्षत दिवेदी, कान्हा गुप्ता, रवि विश्वकर्मा सहित सैकड़ों छात्र, युवा एवं सामाजिक कार्यकर्त्ता मौजूद थे।

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