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सहजता के प्रतिमूर्ति, वरिष्ठ भाजपा नेता और समाजसेवी भुवनेश्वर शर्मा का निधन,नम आँखों से दी गई अंतिम विदाई

 




​अनूपपुर

इसे नियति का एक अत्यंत क्रूर और दुखद फैसला ही कहा जाएगा कि अनूपपुर और कोतमा अंचल ने अपने एक सबसे लाडले, सेवाभावी और निष्ठावान सपूत को हमेशा के लिए खो दिया है। अपने अद्वितीय सेवाकार्यों और बेहद सरल व सहज व्यक्तित्व से क्षेत्र के जन-जन के दिलों में राज करने वाले वरिष्ठ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता और प्रख्यात समाजसेवी भुवनेश्वर प्रसाद शर्मा अब हमारे बीच नहीं रहे। बीते ३ जून को ७१ वर्ष की आयु में उनके गृह ग्राम लामा टोला स्थित निवास पर उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर जैसे ही हवा के झोंके की तरह चारों ओर फैली, संपूर्ण लामा टोला गाँव सहित पूरे कोतमा नगर और आसपास के सुदूर अंचलों में गहरे शोक की लहर दौड़ गई। इस खबर को सुनकर हर कोई इस अपूरणीय क्षति से स्तब्ध, निशब्द और मर्माहत नजर आया।


*नम आँखों से विदाई, अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब

​४ जून का दिन लामा टोला और पूरे क्षेत्र के इतिहास में एक अत्यंत भावुक और विदारक दिन के रूप में दर्ज हो गया, जब भुवनेश्वर प्रसाद शर्मा जी की अंतिम विदाई और अग्निदाह संस्कार संपन्न हुआ। उनकी अंतिम यात्रा में केवल लामा टोला के ग्रामीण ही नहीं, बल्कि दूर-दराज के क्षेत्रों से आए सैकड़ों लोग शामिल हुए। इस दौरान विभिन्न राजनेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, प्रबुद्ध व्यापारियों और आम नागरिकों ने उनके पार्थिव शरीर पर श्रद्धासुमन अर्पित कर उन्हें अश्रुपूरित विदाई दी। जब उनकी पार्थिव देह पंचतत्व में विलीन हो रही थी, तो वहाँ मौजूद हर शख्स की आँखें नम थीं और मुखाग्नि के समय उपस्थित विशाल जनसमूह ने उनके द्वारा समाज के लिए किए गए अविस्मरणीय व निस्वार्थ कार्यों को बहुत ही आदर के साथ याद किया।


​सहजता और सादगी के धनी थे भुवनेश्वर जी

​भुवनेश्वर प्रसाद शर्मा एक ऐसी विरल शख्सियत थे, जिनका पूरा जीवन 'सादगी और उच्च विचार' का साक्षात उदाहरण माना जाता था। वे जितने बड़े राजनेता और समाजसेवी थे, उतने ही जमीन से जुड़े और बेहद संवेदनशील इंसान भी थे। उनका व्यक्तित्व पूरी तरह से अजातशत्रु था, जिसके कारण राजनीति के गलियारों में लंबे समय तक सक्रिय रहने के बावजूद उनके मन में किसी के प्रति कोई द्वेष नहीं था। यही वजह थी कि विरोधी विचारधारा के लोग भी उनकी सहजता और विनम्रता के कायल रहते थे। वे सचमुच हर दिल अजीज थे; गाँव का कोई गरीब-असहाय हो या नगर का कोई संभ्रांत नागरिक, भुवनेश्वर जी सभी से एक ही गर्मजोशी, आत्मीयता और अपनेपन के साथ मिलते थे। वे मदद के लिए हमेशा तत्पर रहते थे और उनके दरवाजे से कभी कोई जरूरतमंद खाली हाथ नहीं लौटा, क्योंकि समाज के शोषित व वंचित वर्ग के उत्थान के लिए वे हमेशा अग्रिम पंक्ति में खड़े नजर आते थे।


*​राजनीति और समाजसेवा के एक मजबूत स्तंभ का ढहना*

​भारतीय जनता पार्टी के एक वरिष्ठ और निष्ठावान स्तंभ के रूप में उन्होंने संगठन को सींचने और मजबूत करने में अपना एक लंबा समय दिया। उन्होंने हमेशा मूल्यों और सिद्धांतों की राजनीति की और विपरीत परिस्थितियों में भी कभी अपने नैतिक सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। समाजसेवा के प्रति उनके इसी निश्छल समर्पण के कारण वे सिर्फ एक पार्टी विशेष के नेता नहीं, बल्कि पूरे समाज के सच्चे मार्गदर्शक और अभिभावक बन चुके थे। उनके अवसान पर क्षेत्र के प्रबुद्ध जनों का कहना है कि भुवनेश्वर प्रसाद शर्मा जी का जाना केवल उनके परिवार या भाजपा की क्षति नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण क्षेत्र के लिए एक ऐसी शून्यता है जिसे कभी भरा नहीं जा सकेगा। हमने आज एक सच्चा हितैषी और समाज ने अपना एक सच्चा सेवक खो दिया है।

​भुवनेश्वर प्रसाद शर्मा जी भले ही आज हमारे बीच भौतिक रूप से मौजूद नहीं हैं, लेकिन उनका सरल स्वभाव, उनकी प्रेरणादायी बातें और समाज कल्याण के लिए किए गए उनके कार्य हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेंगे। ईश्वर पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिवार को इस अपार दुख व वज्रपात को सहने की शक्ति प्रदान करें।

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