







अनूपपुर
जमुना कालरी क्षेत्र आज भगवामय हो गया। यहाँ आयोजित 'विराट हिंदू सम्मेलन' में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। कार्यक्रम की शुरुआत राम जानकी मंदिर से एक भव्य रैली के रूप में हुई। यह विशाल शोभायात्रा पूरे जमुना कालरी क्षेत्र का भ्रमण करते हुए स्टाफ दुर्गा पंडाल पहुंची, जहाँ इसने एक ऐतिहासिक धर्मसभा का रूप ले लिया।
सम्मेलन में उपस्थित संतों और वक्ताओं ने हिंदू समाज को संगठित होने, पारिवारिक मूल्यों को बचाने और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प दिलाया।
"शास्त्र ही सनातन का आधार, संगठित होना समय की मांग"
आचार्य हरिनारायण शास्त्री जी ने सनातन धर्म की वैज्ञानिकता और परंपराओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मनगढ़ंत बातों के बजाय हमारे ऋषियों द्वारा लिखित धर्मग्रंथ ही हमारे जीवन का आधार होने चाहिए। वर्ण व्यवस्था और सामाजिक समरसता पर बोलते हुए उन्होंने शरीर के अंगों का उदाहरण दिया। उन्होंने समझाया कि जिस प्रकार हाथ, पैर और आँखों का कार्य अलग है लेकिन वे एक ही शरीर का हिस्सा हैं, उसी प्रकार हमारी जातियां अलग हो सकती हैं, लेकिन हमारा मूल 'सनातन' एक है। उन्होंने आह्वान किया कि धर्म पर होने वाले आघातों का मुकाबला करने के लिए समाज को एक मुट्ठी बनकर खड़ा होना पड़ेगा।
"राम राज्य चाहिए तो राम के पथ पर चलना होगा"
कथा वाचक जया मिश्रा ने अपने ओजस्वी संबोधन में कहा कि केवल 'राम राज्य' की कामना करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि राम के दिखाए मर्यादा के मार्ग पर चलना भी होगा। उन्होंने समाज में व्याप्त ईर्ष्या और द्वेष पर प्रहार करते हुए कहा, "हम रामायण और भागवत को तो मानते हैं, लेकिन रामायण और भागवत 'की' नहीं मानते। जब तक हमारे मन से एक-दूसरे के प्रति ईर्ष्या खत्म नहीं होगी, हिंदू समाज एक नहीं हो सकता।"
उन्होंने पारिवारिक एकता को राष्ट्र की एकता की नींव बताते हुए कहा कि यदि घर में भाई-भाई के बीच दीवार खड़ी होगी, तो 'वसुधैव कुटुम्बकम्' का सपना कभी पूरा नहीं हो सकता।
'कुटुंब प्रबोधन' और 'प्लास्टिक मुक्त भारत' का आह्वान
महाकौशल प्रांत के सेवा प्रमुख आत्माराम दीक्षित ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 'पंच परिवर्तन' के सूत्र को विस्तार से समझाया। उन्होंने डॉ. हेडगेवार के संघर्षों को याद करते हुए वर्तमान समय में संयुक्त परिवार (कुटुंब प्रबोधन) की आवश्यकता पर जोर दिया।
श्री दीक्षित ने समाज के गिरते नैतिक मूल्यों पर चिंता जताते हुए एक व्यावहारिक सलाह दी: "परिवार को कम से कम भोजन के समय टीवी और मोबाइल को 'पार्किंग' में लगाकर एक साथ बैठना चाहिए और सुख-दुःख साझा करना चाहिए।"
इसके साथ ही उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए 'पन्नी (प्लास्टिक) मुक्त भारत' बनाने और हर घर में वृक्षारोपण करने का संकल्प दिलाया, ताकि गौ माता और प्रकृति दोनों की रक्षा हो सके।
इस विशाल समागम में उमड़ी भीड़ और वक्ताओं के विचारों ने क्षेत्र में धर्म और राष्ट्रभक्ति की एक नई अलख जगा दी है।
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