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10 एवं 11 जनवरी को जमुना में ऑल इंडिया टाईगर्स कप ओपन कराटे चौम्पियनशिप-26,

10 एवं 11 जनवरी को जमुना में ऑल इंडिया टाईगर्स कप ओपन कराटे चौम्पियनशिप-26, इंटरनेशनल टाईगर्स फुल कॉनटेक्ट कराटे फेडरेशन एण्ड इंटरनेशनल पिसुमकु शूटकन कराटे डू-फेडरेशन के द्वारा किया जा रहा है आयोजित
अनूपपुर जिले जमुना कॉलरी के सामुदायिक भवन में 10 एवं 11 जनवरी को "ऑल इंडिया टाईगर्स कप ओपन कराटे चैम्पियनशिप " का आयोजन भव्य आयोजन किया जा रहा है। जिसमें क्षेत्र की जनता तथा अभिभावकों को पहुंचाने की अपील की गई है। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर रामअवध सिंह जी (अध्यक्ष न.पा.प.पसान), प्रभाकर राम त्रिपाठी (क्षेत्रीय महाप्रबंधक जमुना/कोतमा) ,सिस्टर मैरी टी.के. ('रीजनल मैनेजर' विकास मैत्री कोतमा) सिस्टर आईरिन लोबो ('मैनेजर' सेन्ट जोसेफ स्कूल कोतमा) सिस्टर सीमा मिंज ('प्रिंसिंपल सेन्ट जोसेफ स्कूल कोतमा) धीरेन्द्र सिंह जी 'मिन्टू' (मण्डल अध्यक्ष पसान) विपुल शुक्ला (थाना प्रभारी भालूमाड़ा) रहेंगे कार्यक्रम केआयोजक -भोला मिंज एण्ड टाईगर्स कराटे फेडरेशन ने बताया कि आज के दौर में बेटियों को कराटे सीखना क्यों ज़रूरी है,इसके पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं। कराटे सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि आत्मरक्षा, आत्मविश्वास और मानसिक मजबूती का सशक्त माध्यम है। 1. आत्मरक्षा के लिए बेहद ज़रूरी आज के समय में बेटियों की सुरक्षा एक बड़ी चिंता है। कराटे उन्हें खुद की रक्षा करना सिखाता है, ताकि वे किसी भी खतरे या गलत स्थिति में खुद को सुरक्षित रख सकें। 2. आत्मविश्वास में वृद्धि कराटे सीखने से डर कम होता है और आत्मविश्वास बढ़ता है। बेटी खुद को कमजोर नहीं, बल्कि सक्षम और मजबूत महसूस करती है। 3. मानसिक और शारीरिक मजबूती कराटे से शरीर मजबूत, फुर्तीला और स्वस्थ रहता है। साथ ही एकाग्रता, अनुशासन और मानसिक संतुलन भी विकसित होता है। 4. निर्भरता से स्वतंत्रता की ओर कराटे सिखाता है कि मुश्किल समय में दूसरों का इंतज़ार नहीं, बल्कि खुद पर भरोसा करना ज़रूरी है। यह सोच बेटियों को आत्मनिर्भर बनाती है। 5. डर और तनाव से मुक्ति कराटे करने से तनाव, घबराहट और भय कम होता है। बेटियाँ मानसिक रूप से अधिक साहसी बनती हैं। 6. नेतृत्व और साहस का विकास कराटे से नेतृत्व क्षमता, निर्णय लेने की शक्ति और साहस बढ़ता है, जो जीवन के हर क्षेत्र में काम आता है। 7. सामाजिक सोच में बदलाव जब बेटियाँ कराटे सीखती हैं, तो समाज में यह संदेश जाता है कि बेटियाँ कमजोर नहीं, बल्कि सक्षम और आत्मरक्षा में समर्थ हैं। इसलिए आज के दौर में हर अभिभावक अपनी बेटियों को कराटे सीखने की प्रेरणा देनी चाहिए

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