अनूपपुर जिले के ग्राम पंचायत बदरा के कुसियरा फाटक के पास संचालित चंद्रमा सिंह पेट्रोल पंप फिर एक बार सुर्खियों पर है। दरअसल क्षेत्र में जनचर्चा है कि मप्र शासन की भूमि पर संचालित पेट्रोल पंप को बन्द कराने की मांग को लेकर स्थानीय लोगो ने शिकायते की थी व तत्काल पेट्रोल पंप को बन्द कराने शासन से मांग भी की थी। जिसपर पेट्रोल पंप के आनर चंद्रमा सिंह द्वारा उच्च न्यायालय जबलपुर में लगाई गई प्रथम अपील खारिज होने के बाद सेकंड अपील भी इस आधार पर खारिज कर दी गयी कि चंद्रमा सिंह ने भूमि स्वामी होते हुए भूमिहीन बनकर 5.67 एकड़ मप्र शासन की भूमि का आवंटन अपने पक्ष में लिया था और फिर इसी भूमि पर पेट्रोल पंप संचालित करके वर्षों तक मुनाफा कमाते रहे, सामाजिक कार्यकर्ता संग्राम सिंह और राहुल अग्रवाल की शिकायत पर जांच हुई तब जाकर जमीन मप्र शासन को मिली इसके बाद चंद्रमा सिंह उच्च न्यायालय चले गए थे, वर्ष 2020 से मामला विचाराधीन था। जो 30/01/2025 को उच्च न्यायालय ने चंद्रमा सिंह की अपील खारिज कर दी है। देखना यह होगा कि क्या प्रशासन शासन की भूमि को खाली कराएगी या मामला अब सुप्रीम कोर्ट जाएगा।
क्या है मामला
दरअसल उक्त मामले की शिकायत के बाद अनावेदक चन्द्रमा सिंह द्वारा अपना पक्ष रखते हुए 2018/19 में कमिश्नरी शहडोल में अपील की गई थी। जहां सक्षम अधिकारी द्वारा प्रकरण का अवलोकन किया गया। उभयपक्ष की ओर से प्रस्तुत तर्कों एवं विधिक स्थितियों पर विचार किया गया। प्रकरण के अवलोकन एवं विधिक स्थितियों से विचार करने पर प्रथम दृष्ट्या स्पष्ट हुआ कि ग्राम-बदरा, तहसील एवं जिला अनूपपुर की भूमि खसरा नं. 2717 रकवा 0.80 एकड़ अर्थात् 0.324 हे. भूमि अनावेदक चन्द्रमा सिंह के नाम राजस्व प्रकरण क्र.
54/अ-19 (4)/1980-81
आदेश दिनांक 16.02.1982 द्वारा फर्जी व्यवस्थापन की शिकायत सूचनाकर्ता द्वारा प्राप्त होने पर प्रकरण स्वमेव निगरानी में दर्ज कर अनुविभागीय अधिकारी, अनूपपुर से प्रतिवेदन बुलाया गया तथा अनावेदक से भी जवाब लिया गया व प्रकरण में तर्क श्रवण किये गये।
भूमिहीन बनकर 5.67 एकड़ शासन की भूमि का लिए आवंटन
कमिश्नरी में चले प्रकरण में यह स्पष्ट हुआ कि उत्तरवादी द्वारा अपने लिखित तर्क में यह स्वीकार किया गया है कि उनके एवं परिवार के नाम कदमटोला सहित अन्य गांव में 1399 एकड भूमि रही है तथा प्रश्नाचीन भूमि
अनावेदक की भूमि के नीचो बीच स्थित होने एवं उसका उपयोग किसी और के काम का नहीं होने से यह भूमि अनावेदक के नाम व्यवस्थापन की गयी है। प्रकरण के अवलोकन से यह स्पष्ट हुआ कि खसरा नं. 2417 का जुज रकवा 7.50 एकड भूमि
वर्ष 1974-75 में मध्यप्रदेश शासन के नाम दर्ज रही है। जिसका स्वतंत्र व्यवस्थापन अन्य भूमिहीनों को किया जा सकता था तथा अनावेदक के नाम भूमिस्वामी के रूप में 5.67 एकड भूमि पूर्व से ही भूमि होने से व्यवस्थापन के प्रावधानों के विपरीत व्यवस्थापन होने से अनावेदक को किया गया व्यवस्थापन आदेश निरस्त किया जाता है तथा तहसीलदार, अनूपपुर को आदेशित किया जाता है कि प्रश्नाधीन भूमि का राजस्व अभिलेख में मध्यप्रदेश शासन के नाम अंकित किया जावे। उक्त आदेश के बाद चंद्रमा सिंह ने जबलपुर उच्च न्यायालय में अपील किये जहां द्वितीय अपील भी खारिज हो गयी है। इस प्रकरण में केविएट वरिष्ठ अधिवक्ता उच्च न्यायालय दीपक पांडे द्वारा लगाई गई थी और अंतिम बहस के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता उच्च न्यायालय जबलपुर जितेश श्रीवास्तव द्वारा की गई। यह जानकारी सामाजिक कार्यकर्ता व शिकायत कर्ता राहुल अग्रवाल, व संग्राम सिंह द्वारा दी गयी।
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